मैं वो पेड़ हूँ,
जो कट कर भी तुम्हारी सेवा मे लगी रहूँ.
मैं वो दिया हूँ,
जो खुद जलकर दूसरों का अँधेरा मिटा सकूँ.
मैं वो सूरज हूँ,
जो सबको प्रकाश दूँ.
मैं वो चाँद हूँ,
जो अंधेरे को मिटा दूँ.
मैं वो तारा हूँ,
जिसे दिशा दिखा सकूं.
मैं वो पंछी हूँ,
जो पंख पसारे आसमान को छूलूँ.
मैं वो इन्द्रधनुष हूँ,
जो एक ही पल मैं सबको खुश कर दू.
मैं वो स्मित हास्य हूँ,
जो बस खुशियाँ बसेर दू.
मैं वो कश्ती हूँ,
जो किसी तूफान से न डरूं.
मैं वो पत्थर हूँ,
जिसे तराशो तो भगवान् बन जाऊं.
बाटो गे अगर तो बट् जाऊ,
जोड़ों गे अगर तो जुड़ जाऊं.
प्यासे की प्यास बुझाऊ,
या फिर नानी याद दिलाऊं.
समझाओ तो समझ लूँ,
न समझो तो भी समझलूँ.
मैं वो हूँ
जो न किसी के समझ आऊ,
न किसी को समझ मैं आऊ.
इतनी इबादत किसी में नहीं,
की मुझे कोई समझ सकें.
ख़ामोशी मेरी
उस के लिए सजा हैं,
इसलिये मै सदा मुस्कराहट के पीछे छिपी रहती हूँ.
- दिपाली गोखले
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